हम इसे क्यों प्रयोग करते हैं?
04/01/2022
जनसत्ता हिन्दी न्यूज के ऑनलाइन ब्लॉग (https://www.jansatta.com/blog/yogi-adityanath-will-remain-cm-of-up-or-not-and-will-bjp-return-to-power-or-not-is-a-redundant-question-says-former-sc-judge-markandey-katju/1729424/) में छपे जस्टिस (रि) मार्कण्डेय काटजू के इस कथन से सत्य बहुमत पार्टी पूरी तरह से सहमत हैं कि मौजूदा संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली में देश की जनता के जीवन स्तर में कोई सुधार नही हो सकता । बेरोजगारी, अपराध , शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी अनगिनत समस्याओं का हल गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति से बनने वाली सरकारों से संभव नही हैं । सत्य बहुमत पार्टी पिछले 15 सालों से इस गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का विरोध कर रही है , जस्टिस काटजू के इस सुझाव का हम स्वागत करते हैं कि देश के बुद्धिजीवी देशभक्तों को मौजूदा संसदीय प्रणाली का विकल्प खोज़ना चाहिए । सत्य बहुमत पार्टी इसके लिए चर्चा और बहस करने के लिए तैयार है ।
आजादी के पश्चात हमारे राजनेताओं ने प्रजातंत्र व निष्पक्ष चुनावों को आधार मानते हुए बहुमत की सरकार से शासन करना तय किया । पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए लोकसभा के 543 सांसदों का चुनाव वोटों के बहुमत से होना तय हुआ, और सरकार बनाने के लिए ये तय किया कि सरकार उस नेता के नेतृत्व में बनेगी जिसके पास जीते हुए 543 सांसदों में से कम से कम 272 सांसदों का समर्थन होगा , यानि सांसद तो चुने जाएंगे वोटों के बहुमत से और सरकार बनेगी सांसदों के बहुमत से । सांसदों के चुनाव वोटों के बहुमत से होते हैं इस व्यवस्था से सत्य बहुमत पार्टी सहमत है, परन्तु सांसदों के बहुमत से सरकार बनाने की राजनीति का~ सत्य बहुमत पार्टी~ विरोध करती है ।
सच्चे प्रजातंत्र की राजनीति में बहुमत अधिक वोटों से होना चाहिए न कि गठबंधन, समझौते , सांठ-गांठ और जोड़- तोड़ की भ्रष्ट राजनीति करके अधिक सांसदों से । सांसदों के बहुमत से सरकार बनाने के विकल्प में देश के अधिकतम मतदाता चाहते हैं कि जब लोकसभा के पूरे देश में 543 प्रतिनिधियों के चुनाव होते हैं, उस समय जिस भी राजनीतिक दल को अन्य राजनीतिक दलों की तुलना में पूरे देश में सबसे अधिक वोट मिले हों उस राजनीतिक दल के नेता का सरकार बनाने के लिए बिना किसी भ्रम और संदेह के स्पष्ट बहुमत मान लिया जाना चाहिए । जिन उम्मीदवारों को अन्य उम्मीदवारों की तुलना में वोट अधिक मिल गए वे उम्मीदवार प्रतिनिधि चुने गए. और जिस राजनीतिक दल को अन्य राजनीतिक दलों की तुलना में पूरे देश में सबसे अधिक वोट मिल गए, वह राजनीतिक दल सरकार बनाएं।
मैं समझता हूं कि सांसदों के बहुमत से सरकार बनाना ही भ्रष्टाचार का एकमात्र कारण है। जिसके कारण देश के गरीब नागरिकों का जीवन स्तर अच्छा नही है. सांसदों के बहुमत की राजनीति बिना गठबंधन , जोड़- तोड़ , सांठ- गांठ और भ्रष्ट समझौतों के सम्भव नहीं है, इसलिए भ्रष्टाचार का जन्म और आरम्भ होता ही सांसदों के बहुमत की राजनीति से है, इसके विकल्प में वोटों के बहुमत की राजनीति से सरकार बनाने के लिए गठबंधन और भ्रष्ट समझौते करने की आवश्यकता ही नही है, परिणामस्वरूप इस राजनीति में भ्रष्टाचार हो ही नहीं सकता। मैं सांसदों के बहुमत को भ्रष्ट बहुमत की राजनीति मानता हूं और वोटों के बहुमत को सत्य बहुमत की राजनीति कहकर गर्व का अनुभव करता हूं । भ्रष्ट राजनीति से मुक्त होने के लिए सरकार सांसदों के बहुमत से न बनकर वोटों के बहुमत से बने, इसी राजनीति को समझकर सत्य बहुमत को स्थापित करवाने की क्रांति सत्य बहुमत है।
मान लो पूरे देश में सभी 543 सांसदों के चुनावों में दो राजनीतिक दल चुनाव के मैदान में हैं, पहले दल के 300 सांसद कुल 45 लाख वोट प्राप्त करके विजयी होते हैं और दूसरे दल के 243 सांसद कुल 55 लाख वोट प्राप्त करके विजयी होते हैं, आप ही बताइए बहुमत से सरकार बनाने का अधिकार किसका होना चाहिए . कम वोटों से अधिक सांसदों का या अधिक वोटों से कम सांसदों का ? सत्य बहुमत की राजनीति स्पष्ट रूप से दूसरे राजनीतिक दल का जिसके पास वोट अधिक हैं भले ही सांसद कम , बहुमत से सरकार बनाने के अधिकार का समर्थन करती है । आजादी के बाद से लेकर आज तक लगभग 70 वर्षों से हमारे भ्रष्ट राजनेताओं ने बहुमत के नाम पर, सांसदों के बहुमत का खोटा सिक्का चलाकर देश की गरीब जनता को चाहे शिक्षित या अशिक्षित अच्छा मूर्ख बना रखा है। व्यक्तिगत रूप से किसी नेता , राजनेता या राजनीतिक दल का केवल विरोध करना सत्य बहुमत का उद्देश्य नही है, सत्य बहुमत का लक्ष्य वर्तमान भ्रष्ट राजनीति और भ्रष्ट राजनेताओं के जबड़े में फंसे गरीब मतदाताओं को आजाद करके उन्हें देश के प्रजातंत्र का सच्चा स्वामी बना देना । सत्य बहुमत की राजनीति को स्वीकार करके आप अपने आप को कितना शक्तिशाली अनुभव करेंगे- अपनी आंखों से देखना –ये कल्पना नही प्राकृतिक सच्चाई है।
सांसदों के बहुमत की राजनीति अच्छे लोगों को चुनने की राजनीति है ही नहीं, बल्कि इस राजनीति में तो प्रवेश करते ही अच्छे लोग भी अपने आप ही भ्रष्टाचार के समर्थक बन जाते हैं । इस राजनीति में जीतने वाला सांसद दूसरे उम्मीदवारों की तुलना में चाहे एक वोट अधिक लेकर जीते या जीतने वाला सांसद दूसरे उम्मीदवारों की तुलना में चाहे कितने ही लाख वोट अधिक लेकर जीते दोनों का महत्व एक जैसा है, इसीलिए सांसदों के बहुमत की राजनीति में न तो मतदाताओं का कोई महत्व और न ही अच्छे उम्मीदवारों के चुने जाने की कोई सम्भावना । विश्व के महानतम प्रजातंत्र में सांसदों के बहुमत से सरकार बनाने की व्यवस्था में मतदान किस प्रकार से होता है आपने कभी विचार किया :
1.लगभग 40 प्रतिशत मतदाता सांसदों के बहुमत की भ्रष्ट राजनीति को मतदान करना ही नहीं चाहते ।
2.18-25 वर्ष की आयु के लगभग 20/25 प्रतिशत मतदाता वोट तो डाल सकते हैं परन्तु चुनाव नहीं लड़ सकते ।
3.लगभग 10/15 प्रतिशत मतदाताओं को किसी प्रकार का भी प्रलोभन जैसे धन, शराब, उपहार , आदि देकर अपने पक्ष में टीं बजवाई जाती है।
4.बचे खुचे 20/ 25 प्रतिशत मतदाता न जाने कौन से अधिकार, किस जिम्मेदारी और किस प्रकार की देशभक्ति को मानते हुए मतदान करने के लिए जाते समय भी और मतदान करके आते समय भी इन राजनेताओं और सरकारी व्यवस्था की जी भरकर आलोचना करते हैं।
5. जिन कुल मतदाताओं ने मतदान किया उसमें से लगभग 60/ 70 प्रतिशत से भी अधिक मतदाताओं ने ऐसे उम्मीदवारों को मतदान किया जो हार गए । क्या कोई भी बुद्धिजीवी ये समझा सकते हैं कि आज की राजनीति में ऐसे मतदाताओं और उम्मीदवारों का क्या महत्व है ? क्या हमने इसी प्रकार के झूठे प्रजातंत्र और गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के बहुमत से सरकार बनाने के लिए लाखों वीरों –विरांगनाओं की कुर्बानी देकर आजादी ली थी ?
जैसे ही आप सत्य बहुमत को समर्थन देंगे , देश की गरीब जनता के जीवन स्तर में अनगिनत सुधार आरंभ हो जाएंगे । इसलिए आइए, हम शीघ्र से शीघ्र अपना समय न बर्बाद करते हुए सोच-समझकर सत्य बहुमत की राजनीति को समर्थन देना आरंभ करें, यकीन मानिए, सत्य बहुमत की राजनीति से ही देश में गरीबों के जीवन स्तर में सुधार की प्रकिया तेज हो जाएगी ।
