गोवा के राजनीतिक घटनाक्रम
02/01/2022
आदरणीय #अरविन्द जी #मुख्यमंत्री दिल्ली को मेरा सादर नमस्ते, न्यूज 24 पर गोवा के राजनीतिक घटनाक्रम पर आपका एक विडियो देखा। सम्भवतः आप ही इकलौते नेता हैं जिन्होंने लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था में दिल्ली के चुनावों में 70 में से 67 विधायक जीतकर एक ऐसा उदाहरण बनाया जो विश्व में अन्य कहीं देखने को नहीं मिलता। गोवा की राजनीति पर बोलते हुए मुझे आश्चर्य इस बात का हुआ कि आप सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त करके बहुमत का विरोध कर रहे हैं, परन्तु आप विधायकों की खरीद फरोख्त न हो, गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का बहुमत न हो, इस पर प्रकाश न डालकर आप बिजली मुफ्त बांटने को राजनीति के दायरे में लाने का प्रयास कर रहे हैं।
भविष्य में राजनीति के अन्दर विधायकों की खरीद फरोख्त न हो, गठबंधन का भ्रष्ट बहुमत न बने और ऐसा बहुमत बने जिसमें मतदाताओं की भूमिका, प्रभाव और महत्व हो ऐसा समाधान जानने को नहीं मिला। आपने चालाकी से दूसरे राजनीतिक दलों पर विधायकों के खरीद फरोख्त करके बहुमत बनाने का विरोध करके गोवा के लोगों को मूर्ख बनाकर सरकारी पैसे और समय का दुरूपयोग करके स्वयं राजनीतिक अवसर की खोज में लगे हुए हो। आप ही के राजनीतिक जीवन की कुछ घटनाऐं स्मरण करवा देता हूंः
1. सबसे पहले आपने दिल्ली में उसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने जिसकी आप गोवा में आलोचना कर रहे हो।
2. जिस राजनीतिक दल की आप गोवा में आलोचना कर रहे हो उसी राजनीतिक दल के साथ मिलकर 2019 लोकसभा के चुनावों में आपने समझौते करने के प्रयास किये।
3. कुछ समय पूर्व झारखंड में गठबंधन के बहुमत से सरकार बनी, और उसके शपथ समारोह में आपकी पार्टी के गणमान्य नेता सम्मलित हुए, क्या इससे ये सिद्ध नहीं होता कि आप गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के समर्थक थे और हैं?
4. आने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी आप कुछ राजनीतिक दलों से गठबंधन करने के लिए तैयार हैं, ऐसी खबरें टी वी चैनलों और अखबारों से जानने को मिलती हैं।
आप गठबंधन के भ्रष्ट बहुमत की राजनीति से सहमत थे, सहमत हैं और भविष्य में भी सभी राजनीतिक दलों की तरह आपकी पार्टी भी गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति के समर्थन में रहेगी, क्योंकि संसदीय राजनीतिक प्रणाली के रहते, जो हमारे देश में है, यदि राजनीति करनी है, यदि विधायकों या सांसदों के बहुमत से सरकार बनानी है, तो गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति किये बिना सम्भव नहीं है। जब चुनावों से पहले जीतने के लिये वोट खरीदे जाते हों चाहे पैसा देकर या मुफ्त बिजली, पानी देने का आश्वासन देकर तब चुनावों के पश्चात बहुमत बनाने के लिए विधायकों या सांसदों को खरीदना अनैतिक कैसे माना जाए!
हमारी संसदीय लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था में बहुमत की चिड़िया कैसी होती है हमें नहीं मालूम, चुनावों के पश्चात सरकार बनाने के लिए केवल बहुमत-बहुमत का राग अलापते रहते हैं, इसीलिए जो नेता दबंगी और धनबली है बहुमत की चिड़िया को फंसाने के लिए दाना उछालता है और दाने के लालच में बहुमत की चिड़िया उड़कर आसानी से जिस नेता ने दाना उछाला उसके हाथ में चली जाती है।
अच्छा होता यदि गोवा के लोगों को मुफ्त बिजली देने के आश्वासन के साथ-साथ चुनावों के पश्चात बहुमत की चिड़िया कैसी होनी चाहिए समझा देते, जिससे चुनावों से पहले मतदताओं को खरीदने का और चुनावों के पश्चात विधायकों या सांसदों को चारीदने बेचने का झगड़ा समाप्त हो जाता। लोकतंत्र में बहुमत कैसे होना चाहिए, यदि आपकी समझ में नहींआ रहा है तो थोड़ा समय निकालकर ~सत्य बहुमत~ की राजनीति को समझ लेना।
मेरे प्रिय गोवा और देश के मतदाताओ आप इस भ्रम में मत रहना कि नेता या राजनीतिक पार्टी बदल देने से आपको न्यायप्रिय और लोकप्रिय व्यवस्था मिल जाएगी। संसदीय लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था में सरकार बनाने के लिए विधायकों या सांसदों का ही बहुमत क्यों माना जाता है, जिसमें बहुमत के लिए भ्रष्ट समझौते और विधायकों व सांसदों की खरीद फरोख्त होनी ही होनी है, इसके विकल्प में मतदाताओं के बहुमत यानि ~सत्य बहुमत~ से सरकार बनाने में क्या आपति है, जिसमें न भ्रष्ट समझौते होंगे और न ही विघायकों और सांसदों की खरीद फरोख्त।
मेरे प्रिय देशवासियो यदि आप नारों और विज्ञापनों के बदले सच्चाई में विकास देखना और करना चाहते हो तो गठबंधन यानि संसदीय राजनीतिक प्रणाली और उसके समर्थक नेताओं का बहिष्कार करके, ~सत्य बहुमत~ यानि मतदाताओं के बहुमत से सरकार बनाने की राजनीति को अपना समर्थन व सहयोग दें। ्सत्य बहुमत पार्टी् के उम्मीदवार बनकर चुनावों में भाग लें। ~सत्य बहुमत~ की राजनीति से जुड़ने की अपील करते हुए आपके सुझााव, समर्थन व सहयोग की प्रतीक्षा में परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि हम सबको स्वस्थ व प्रसन्न रखे।
गठबंधनमुक्त ~सत्य बहुमत~ जिंदाबाद , जिंदाबाद
