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मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली द्वारा “चलो वोटर बनें हम”अभियान

15/01/2022
मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली द्वारा “चलो वोटर बनें हम”अभियान

बहनो भाइयो,

नवंबर 2021 के माह में मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली द्वारा “चलो वोटर बनें हम”अभियान चलाया गया। सभी भारतीय युवक-युवतियां जिनकी आयु 1 जनवरी 2022 तक 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है फार्म-6 भरकर वोटर बन सकते हैं। देश के किसी भी नागरिक को वोटर बनने में गर्व का अनुभव होना चाहिए, और गर्व होने के साथ-साथ मतदाता बनने की जिम्मेवारी, उत्तरदायित्व और जवाबदेही का भी अनुभव होना चाहिये।

18 वर्ष की आयु वाले युवक-युवतियां जो वोटर बनते हैं, इस सच्चाई से तो अवगत होंगे ही कि 25 वर्ष की आयु होने तक वे चुनावों में भाग नहीं ले सकते। 18 से 25 वर्ष की आयु वाले मतदाता कुल मतदाताओं के लगभग 25 से 30 प्रतिशत हैं, आयु के हिसाब से देखें तो सबसे अधिक मतदान करने वालों का प्रतिशत 18 से 25 वर्ष वाले मतदाताओं का ही है, जो चुनावों में भाग ले ही नहीं सकते। इस बात से अवगत होते हुए भी कि 18 से 25 वर्ष की आयु वाले चुनावों में भाग नहीं ले सकते फिर भी, 18 वर्ष की आयु पार करते ही युवक-युवतियां वोटर बनने के लिए ऐसे दौड़ते हैं जैसे, कांटे में फंसी आटे की गोली लपकने के लिए मछली दौड़ती है, जैसे ही मछली आटे की गोली मुंह में लेती है मछली को प्राण गंवाने पड़ते हैं, वैसे ही 18 वर्ष वाले, वोटर बनते ही, गठबंधन की भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था के समर्थक बन जाते हैं।

गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का भेद समझे बिना ही 18 वर्ष की आयु वाले मतदाता बनते ही बड़े हर्षो उल्लास के साथ चुनावों में मतदान करते हैं, इनके मतदान करने से गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति करने वाले नेता चुने जाते हैं, और उन्ही की सरकार बन जाती है, गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति पर आधारित बनी सरकारें जमकर भ्रष्टाचार करती हैं, और अंत में भ्रष्ट व्यवस्था का ठीकरा उन 18 से 25 वर्ष के मतदाताओं पर फूटता है जिन्होंने सबसे अधिक मतदान किया, चाहे नासमझी में ही परन्तु ये सच्चाई है कि इन युवा मतदाताओं ने गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति करने वालों को मतदान किया। गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति करने वाले धूर्त नेताओं ने युवा मतदाताओं को, जिन्होंने पहली बार मतदान किया, जीवन के आरम्भ से ही भ्रष्ट राजनीति का समर्थक बना दिया!

चुनाव आयोग 18 वर्ष के युवाओं को मतदाता बनाने से पहले इन्हें ये तो बता देते कि आप गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति को वोट देने के लिये वोटर बनाए जा रहे हो। ऐसा प्रतीत होता है मानो भ्रष्ट राजनीतिक वयवस्था को बढ़ावा देने के लिए 18 वर्ष की आयु वालों को मतदाता बनाना सरकार और चुनाव आयोग का साझा षड़यंत्र है, और इसी कारण हमारा राजनीतिक, पारिवारिक और सामाजिक ताना बाना कमजोर हुआ।

1947 से 1988 तक मतदाता बनने की आयु 21 वर्ष थी, उसके पश्चात मेरी समझ में दो कारणों के रहते मतदाता बनने की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई, पहला तत्कालीन सत्ताधारी नेता 18 वर्ष वालों को वोटर बनाकर उनके मतदान से सत्ता में बने रहना चाहते थे, और दूसरा 18 वर्ष की आयु वाले युवा मतदाता बनते ही, न्यायप्रिय व लोकप्रिय व्यवस्था की खोज में मतदान करना आरम्भ कर देते हैं, और जब कई बार मतदान करने के पश्चात भी राजनीतिक व्यवस्था पहले से भी अधिक भ्रष्ट हो जाती है, ऐसी परिस्थिति से विमुख होकर मतदाता गठबंधन की भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था को वोट डालना बंद कर देते हैं, परिणामस्वरूप मतदाताओं की घटती संख्या को बढ़ाने के लिए 18 वर्ष की आयु वालों को मताधिकारी बना दिया। यदि इसी प्रकार गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का बोलबाला बना रहा तो आने वाले समय में वोटर बनने के लिए आयु 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष या 15 वर्ष भी हो जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं, संसद में किसी भी उचित-अनुचित बिल को पास करवाने में गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति करने वाले नेताओं को 3 मिनट से भी कम समय लगता है।

मेरे प्रिय युवा साथियो वोटर बनने से पहले क्या आपको ये ज्ञान था कि गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति को वोट देने के लिए आपको वोटर बनाया जा रहा है, और वोटर बनने के पश्चात सरकार बनाने में आपका क्या महत्व, क्या भूमिका या क्या प्रभाव होता है, या वोटर बनते ही चुनावों के समय लाइन में लगकर केवल चुनाव की मशीन में टीं बजाकर लौट आते हो, क्या इसी टीं की आवाज सुनने के लिए आप मतदाता बने थे? क्या इस सच्चाई को झुठलाया जा सकता है कि 18 से 25 वर्ष की आयु वाले मतदाताओं ने मतदान करके भ्रष्ट नेताओं को भ्रष्टाचार करने का प्रमाणपत्र दे रखा है? क्या आप ऐसे नेताओं को मतदान करना चाहते थे जो भ्रष्टाचार करें?

जिन नेताओं को वोट देकर आपने सरकारें बनाई क्या इन सरकारों ने आपको रोजगार दिया, क्या शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा मिली, क्या गरीबी, बिमारी, महंगाई, गंदगी, भीड़, भ्रष्टाचार, अपराध से पीछा छुटा, क्या हवा और पानी साफ मिला? मतदाता की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष को हुए लगभग 30-32 वर्ष बीत जाने पर भी राजनीतिक व्यवस्था में क्या सुधार देखने को मिला, क्या गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का विकल्प बना, क्या आज गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का विकराल रूप देखने को नहीं मिलता? मेरे युवा साथियो केवल वोटर न बनकर गठबंधन की भ्रष्ट राजनीति का विरोध करते हुए गठबंधनमुक्त राजनीतिक विकल्प के निर्माण में भागीदार बनकर जिम्मेवार व जागरूक वोटर बनो जिससे समस्याओं के समाधान हो सकें। वोटर बनकर स्वयं समस्या नहीं समाधान बनो।

हमने ~सत्य बहुमत~ के आधार पर ~सत्य बहुमत पार्टी~ गठबंधनमुक्त राजनीतिक विकल्प बनाया है। ~सत्य बहुमत पार्टी~ की सरकार बनते ही, मतदाता बनने की और चुनावों में भाग लेने की आयु समान कर दी जाएगी। यदि 18 से 25 वर्ष के युवा, मतदाता बनने के ोग्य हैं तो चुनावों में भाग लेने के योग्य क्यों नहीं? भारत के युवा देश का भविष्य हैं। जागरूक मतदाता और जिम्मेवार नागरिक बनने का परिचय देते हुए समझकर ~सत्य बहुमत पार्टी~ से जुड़ें। पूरे विश्व में ~सत्य बहुमत~ सर्वश्रेष्ठ राजनीति है, ~सत्य बहुमत~ हारने और घाटे का विचार नहीं है। ~सत्य बहुमत~ पर चर्चा करने के लिए समय निश्चित करके आप कभी भी मेरे से मिलने का कार्यक्रम बना सकते हैं। आपके सुंदर, समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए परमपिता परमेश्वर हम सबको स्वस्थ व प्रसन्न रखे।

मेरे युवा साथियो याद रखना, गठबंधन की राजनीति समस्या है और ~सत्य बहुमत~ समाधान

गठबंधनमुक्त ~सत्य बहुमत~ जिन्दाबाद-जिन्दाबाद